अपने ही नेताओ को हाशिए पर ढकेल मोदी से कैसे लड़ेगी कांग्रेस ?
  • पार्टी का नाराज नेतृत्व बन सकता है बड़ी चुनौती
  • कांग्रेस के निशाने पर है जितिन प्रसाद

अब यह तो तय है कि कांग्रेस (Congress) पार्टी का आंतरिक लोकतंत्र खतरे में है।नया अध्यक्ष चुनने और पार्टी में अंदरूनी कलह रोकने की चुनौतियों से जूझ रही कांग्रेस (Congress) एक के बाद एक ऐसे क़दम उठा रही है, जिनसे जनता में उसकी छवि सुधरने और बिगड़ती ही जा रही है।बीते गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक कमेटी का गठन किया, जिसे मोदी (Narendra Modi) सरकार की तरफ़ से जारी किए गए अध्यादेशों का अध्ययन करके इन पर पार्टी का नज़रिया तय करने की ज़िम्मेदारी दी गई है।

 हाशिए पर धकेले जा रहे पार्टी से अंशन्तुष्ट नेता ?

चौकाने वाली बात तो यह है कि इस पांच सदस्यों वाली इस कमेटी में उन 23 नेताओं में से एक को भी जगह नहीं दी गई है जिन्होंने पार्टी नेतृत्व में बदलाव और कार्यशैली में सकारात्मक सुधार की मांग करते हुए सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी। इसे चिट्ठी लिखने वाले नेताओं को पार्टी ने सिर्फ नजरअंदाज नही किया बल्कि हाशिए पर धकेलने की पूरी कोशिश भी की। वही कांग्रेस (Congress) अध्यक्ष सोनिया गांधी की बनाई गई इस कमेटी में पी. चिदंबरम, दिग्विजय सिंह, जयराम रमेश, डॉ अमर सिंह और गौरव गोगोई को रखा गया हैं। तो वही जयराम रमेश को समिति का संयोजक बनाया गया है। यह कमेटी केंद्र के द्वारा जारी किए गए प्रमुख अध्यादेशों पर चर्चा और पार्टी का रुख़ तय करने का काम करेगी। ये पांचों गांधी परिवार के काफी क़रीबी माने जाते हैं। इस कमेटी में ग़ुलाम नबी आज़ाद, कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा जैसे नेताओं को शामिल नहीं किए जाने पर कई सवाल खड़े हो रहे है।

 Congress में आंतरिक खामोशी

दो दिन पहले कांग्रेस (Congress) कार्यसमिति की बैठक के दौरान इन नेताओं समेत 23 नेताओं की ओर से सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी पर जमकर हंगामा हुआ था। चिट्ठी लिखने वाले नेताओं पर बीजेपी से सांठगांठ के बड़े आरोप तक लगे थे, हालांकि बाद में इन आरोपों से पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इनकार किया था।इस कमेटी में सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखने वाले नेताओं को शामिल नहीं करने के मुद्दे पर कांग्रेस (Congress) का कोई भी नेता या प्रवक्ता मुंह खोलने का तैयार नहीं है।

कमेटी में उन्हीं नेताओं को जगह दी गई है, जिनके पास पहले से कोई ज़िम्मेदारी नहीं है। इसके गठन में किसी को ख़ास तवज्जो देना या किसी को नज़रअंदाज़ करने जैसी कोई बात नहीं है। पार्टी अध्यक्ष होने के नाते सोनिया गांधी को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि किसे कौन सी जिम्मेदारी दी जाए। जब इन नेताओं से यह पूछा गया कि क्या कमेटी में शामिल किए गए नेता अध्यादेशों के बारे में राज्यसभा में विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद, उप नेता आनंद शर्मा, संविधान और क़ानूनी मामलों के जानकार कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार शशि थरूर जैसे नेताओं के मुक़ाबले ज़्यादा बेहतर राय दे सकते हैं? उनके पास यह कहने के सिवा कोई चारा नहीं बचा कि आलाकमान के फ़ैसले पर वो कुछ कह नही सकते।

 नाराज़ है नेतृत्व

सोनिया गांधी ने भले ही इसे पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र ज़िंदा रहने का हवाला देते हुए मामला रफ़ादफ़ा करने की तमाम कोशिश की हो। लेकिन जिस तरह राहुल ने इस चिट्ठी और इसे लिखने वालों के ख़िलाफ़ सख्त तेवर दिखाए थे, उसे देखते हुए लगता नहीं कि वह इतनी जल्दी मामले को रफादफा करेंगे।राहुल खेमे के लोग चिट्ठी लिखने वाले नेताओं को निपटाने में जुट हुए है। कार्यसमिति का बैठक के बाद इन नेताओं को दी गई नसीहत से राहुल के क़रीबी नेताओं का हौसला और बढ़ा है।

 निशाने पर जितिन प्रसाद

ऐसी ही कोशिश देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में भी हुई। लखीमपुर खीरी की ज़िला कांग्रेस (Congress) कमेटी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग की है। फिलहाल उत्तरप्रदेश में भी कांग्रेस की स्थिति काफी बेहतर नही है।

कपिल सिब्बल खुल कर जितिन प्रसाद के बचाव में आगे आए है। सिब्बल ने कहा है कि पार्टी को अपने लोगों पर नहीं, बल्कि बीजेपी पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने की तैयारी करनी चाहिए। सिब्बल ने ट्वीट किया है, ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण है कि उत्तर प्रदेश में जितिन प्रसाद को आधिकारिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। कांग्रेस को अपने लोगों पर नहीं, बल्कि बीजेपी को सर्जिकल स्ट्राइक से निशाना बनाने की ज़रूरत है।’’ उनके इस ट्वीट से परोक्ष रूप से सहमति जताते हुए कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने ट्वीट किया, ‘भविष्य ज्ञानी’।

दरअसल कांग्रेस (Congress) आलाकमान ख़ासकर सोनिया गांधी नेतृत्व में बदलाव और पार्टी की कार्यशैली में सुधार की माँग को लेकर लिखी गई इस चिट्ठी को लेकर पसोपेश में दिखती हैं। इस चिट्ठी को राहुल समर्थक सोनिया और राहुल के ख़िलाफ़ बग़ावत मान रहे हैं जबकि इसमें इन दोनों के नेतृत्व में पूरा विश्वास जताया है। सोनिया गांधी एक तरफ रूठे आज़ाद और कपिल सिब्बल जैसे नेताओं को मनाने की कोशिश में लगी हैं। वहीं राहुल गांधी के क़रीबी इन नेताओं की घेराबंदी में लगातार जुटे हैं। इन नेताओं पर अंदरूनी तौर पर हो रहे हमलों से कांग्रेस में अंदरूनी जंग और ख़तरनाक मोड़ भी ले सकती है। पार्टी के बेहद वफ़ादार और वरिष्ठ नेताओं को बीजेपी (BJP) से सांठगांठ जैसे गंभीर आरोपों को लगाना गलत है।लिहाज़ा सोनिया गांधी के सामने इस अविशवास के माहौल को दूर करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होना चाहिए। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि कांग्रेस (Congress) ऐसे कैसे बीजेपी से लड़ पाएगी ?

आंतरिक लोकतंत्र विकसित ना करने पर मिट सकती है कांग्रेस ?

One thought on “अपने ही नेताओ को हाशिए पर ढकेल मोदी से कैसे लड़ेगी Congress ?”
  1. बिल्कुल सही विचार है आपके।जो पार्टी अपने ही नेताओ की नही हो सकती वो दुसरो से आखिर कैसे मुकाबला करेगी।

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